Hanumanji aur Negative Energy in Hindi
बजरंगबली ना होते तो मैं पागल हो जाता – हनुमानजी के चमत्कार की सच्ची घटना
दोस्तों आज के इस अनुभव को ध्यान से सुनिएगा क्योंकि इस भक्त ने जो पीड़ा झेली है उससे कई लोग पीड़ित है और उनकी जिंदगी बर्बाद हो रही है, लेकिन बजरंगबली की शरण में जाने के बाद बड़े-बड़े असंभव कार्य संभव हो जाते है, इस अनुभव को ज्यादा से ज्यादा लोगो तक शेयर करे क्योंकि इस अनुभव को पढ़ने के बाद किसी की जिंदगी बच सकती है और बदल सकती है, Hanumanji aur Negative Energy in Hindi
मैं अपना नाम गुप्त रखना चाहता हूँ । मैं हिमाचल प्रदेश का रहने वाला हूँ। आज मैं आपको अपनी जिंदगी का सबसे बुरा अनुभव बताना चाहता हूँ। जिससे मेरे प्रभु बजरंगबली ने ही मुझे बाहर निकाला। मेरा अनुभव ऐसा है की जिससे शायद और भी बहुत से लोगों को मदद मिलेगी।
मेरी जिंदगी में सब कुछ बिलकुल सही चल रहा था। मैं लाइफ की हर चीज़ से बहुत खुश था। पर जिंदगी में कुछ छोटी-छोटी गलतियां कभी बहुत भारी पड़ जाती हैं। ऐसा ही कुछ मेरे साथ भी हुआ। लगभग दो साल पहले की बात है मैं अपने दोस्तों के साथ घर की तरफ जा रहा था। हम हंसी मज़ाक करते हुए खूब मजे से जा रहे थे। Hanumanji aur Negative Energy in Hindi
फिर एक जगह बैठकर वो लोग भांग पीने लगे (जिसे बीड़ी या सिगरेट मे भरकर पिया जाता है) मैं भी पहले बीड़ी सिगरेट पी लेता था। पर एक बार बीमार होने के बाद मैंने बीड़ी सिगरेट पीना छोड़ दिया था। उसके बाद बहुत ही कम या युं कहे की ना के बराबर ही मैंने बीड़ी सिगरेट पिया था पर उस दिन मेरा भी मन था की मै भी उनके साथ भांग पी लूँ। और मैंने उनके साथ भांग पी ली।
थोड़ी देर तक तो सब सही था। मैं घर गया खाना खाया। खाना खाते हुए मुझे डर सा लगने लगा। दिल कमजोर सा हो रहा था और मैं बेवजह ही डरने लगा। मैंने ये सुन रखा था कि भांग पीने से ब्लड प्रेशर लो हो जाता है। जिससे घबराहट होती है। तो मैंने तुरंत पानी का ग्लास लिया और उसमे नमक घोल कर पी लिया। पर बाते और भी सुन रखी थी जैसे की भांग पी कर लोग पागल हो जाते हैं।
बस ऐसी ही नेगेटिव बाते मेरे दिमाग में घूमने लगी। और मैं इतना ज्यादा डर गया की मुझे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था। मुझे पता ही नहीं चल रहा था की मेरे साथ क्या हो रहा है और क्यों हो रहा है। मैं बस हर चीज़ से डर रहा था। यहाँ तक की कही जाने रुकने चलने हर चीज़ से बस डर रहा था। ऐसा लग रहा था की मेरा पूरा जीवन ही बेकार हो गया है।
किसी भी चीज़ का कोई महत्व नहीं महसूस हो रहा था। हर चीज़ व्यर्थ लग रही थी। और इतना सब कुछ सिर्फ मेरे एक खयाल से हो रहा था जो मेरे डर के समय मेरे दिमाग मे आ गया था की कही मैं भांग पीने की वजह से पागल ना हो जाऊं। और ये सब मैं किसी को बता भी नहीं पा रहा था। अगर बता देता तो लोग सच में ही मुझे ये बोल कर पागल घोषित कर देते की भांग इसके दिमाग में चढ़ गयी है।
और उस समय मेरी हालत ऐसी थी की कोई मुझे ऐसा बोल देता की तू पागल हो गया है तो मैं इतना डर जाता की शायद सच मैं ही पागल हो जाता। भले ही कोई इसे मन का वहम कहे या भांग का नशा, पर जयेश भाई जो मैं उस वक्त सहन कर रहा था वो बस मै ही जानता हूँ। Hanumanji aur Negative Energy in Hindi
मैं भांग का नशा उतारने के लिए इंटरनेट पर तरीके देखने लगा। जितना ज्यादा मैं इसके बारे में जानकारी ले रहा था मेरे दिमाग मे उतनी ही नयी-नयी नेगेटिव बाते आ रही थी। मैं बहुत परेशान हो गया था। मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि मुझे हुआ क्या है और क्यों।
मैं अपनी कुलदेवी को बहुत मानता हूँ, मैं बस अपनी कुलदेवी को याद करता और कहता रहता की माता मुझे बचा लो, मेरा जीवन बचा लो। ऐसे ही डर और बेवजह के वहम में एक हफ्ता बीत गया।

फिर जब मैं रात को सो रहा था तो मुझे सपना आया की जैसे किसी बुरी चीज़ ने मुझे मेरे हाथों से पकड़ कर उठाया और हवा में लटका दिया। इससे मेरा डर और वहम बहुत ज्यादा बढ़ गया। मैं सोचने लगा की अब तो शायद नेगेटिव ऐनर्जीस भी मेरे डर की वजह से मुझे दबाने की कोशिश कर रही हैं।
जयेश भाई मैं आपको बता दूँ की इस सब से पहले मैं इतना पॉजिटिव इंसान था की किसी मरते हुए को भी जीना सिखा देता। मेरी जिंदगी जेसे सीधी चलते-चलते अचानक से उल्टी लटक गयी थी। वो भी बस कुछ ही पलों में।
फिर जब बात भूत प्रेत और नेगेटिव ऐनर्जीस की आयी तब मुझे याद आया की मैं बचपन मे हनुमान चालीसा पढ़ता था और उसमे मुझे वो पंक्ति तुरंत याद आ गयी की “भूत पिशाच निकट नहीं आवे, महावीर जब नाम सुनावे”।
मेरी कुलदेवी ने मुझे रास्ता दिखा दिया था अपने डर वहम को दूर करने का। मैं बचपन मे जब भी डरता था तो हनुमान चालीसा पढ़ने लग जाता था। पर उस समय मुझे पता नहीं था की भक्ति क्या होती है। मैं बस हनुमान चालीसा पढ़ लेता था। शायद भविष्य के संकट की तैयारी भगवान ने मुझसे पहले ही करवा ली थी। पर समस्या यही खतम नहीं हुई थी।
मैंने मन में इतने डर वहम पाल लिए थे जो निकल ही नही रहे थे। किसी को बताया भी नहीं था की कोई मेरी कुछ मदद कर देता। सर मैं कभी भी एक झुनझुनाहट सी होती रहती थी (जो मैंने बाद में एक दिन महसूस किया की तब होती है जब हम अचानक से डर जाते हैं जिसे सिर का बाल बाल खड़ा होना भी कहते हैं )। Hanumanji aur Negative Energy in Hindi
मैंने रोज़ हनुमान चालीसा पढ़ना शुरू कर दिया। पहले दो तीन दिन मैंने 3 बार सुबह शाम पढ़ना शुरू किया पर मुझे ऐसा लग रहा था की मुझे 7 बार पढ़नी चाहिए तो मैंने 7 बार हनुमान चालीसा पढ़ना शुरू कर दिया। और यूट्यूब पर भी हनुमान जी के बारे में वीडियोस देखने लगा तो एक दिन आपका चैनल मिला और मैंने आपकी बहुत सी वीडियोस देखी जिसमे लोगों ने अपने अनुभव बताए थे।
जयेश भाई लोगों के ऊपर बजरंगबली की करुणा दया और कृपा के बारे मे जान कर बहुत बार मेरी आँखे भर जाती। और यही सोचता की मेरे प्रभु मुझ पर भी ऐसे ही कृपा करेंगे और मेरे जीवन के इस संकट को भी दूर करेंगे। लगभग 2 महीने बीत गए पर मेरे डर वहम कम ही नहीं हो रहे थे। हमेशा नेगेटिव ही सोचता रहता था।
कभी-कभी तो ऐसा लगता कि आत्महत्या कर लू। फिर घरवालो के बारे मे सोचता की उन पर क्या बीतेगी। उन्हे तो समझ भी नहीं आएगा की अच्छी खासी जिंदगी जीने वाला अचानक क्यों मर गया। अपने बारे में सोच-सोच कर बेवजह ही बैठे-बैठे रो देता था मैं। Hanumanji aur Negative Energy in Hindi
इतने दिनों की घुटन से मैं इतना परेशान हो गया था की जब एक दिन शाम को हनुमान चालीसा पढ़ने बैठा तो जी भर के रोया। उस दिन को मैं कभी नहीं भूल सकता और ना ही भूलना चाहूंगा। वो दिन मुझे हमेशा याद दिलयेगा की मेरे प्रभु ने कैसे मुझे निराशा के अंतिम छोर में भी अकेला नहीं छोड़ा। शायद मेरे प्रभु यही चाहते थे की मैं अपने मन की घुटन को बाहर निकाल दूँ।
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मैंनें प्रभु से उस दिन इतना ही कहा की, “हे प्रभु, या तो कोई रास्ता दिखा दो या मैं अपना जीवन ही समाप्त कर लेता हूँ”। और उसके 2-4 दिन बाद ही आपके चैनल पर एक भक्त का अनुभव आया जिसमे वो भी मेरी ही तरह अपने मन में आये एक नेगेटिव विचार से डर और वहम के चलते पागल होने की स्थिति में पहुँच गया था।
मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे बजरंगबली ने मुझे रास्ता दिखाने के लिए ही उस भक्त से उसका अनुभव शेयर करवाया हो। जयेश भाई सच कहूँ तो आपका चैनल ही मेरी समस्या के समाधान का असली माध्यम बना। उस वीडियो में उस भक्त ने बताया कि कैसे हनुमान जी के मंदिर के पुजारी ने गोमूत्र और हनुमान चालीसा की मदद से उसे ठीक किया।
फिर जैसा-जैसा उस भक्त को बताया गया था मैंनें भी वो ही किया। मैं रोज सुबह उठकर गोमूत्र पीता और सुबह शाम 7 बार हनुमान चालीसा पढ़ता। और पहले दिन से ही मुझे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे मेरे नेगेटिव विचार कम होते जा रहे हों।
मैं हर मंगलवार और शनिवार को बजरंगबली के मंदिर जाता। और प्रभु से यही प्रार्थना करता की प्रभु मेरी नकारात्मकता को जल्दी से जल्दी दूर कर दो। और धीरे-धीरे लगभग एक साल का समय लगा परंतु मेरे प्रभु बजरंगबली ने मेरी नकारात्मकता को दूर कर दिया। मेरे मन के सारे वहम खतम हो गए और जो भी मन मे डर थे प्रभु ने मेरा सामना हर उस परिसथिति से करवाया की कहते है ना की डर का सामना करने से ही डर दूर होता है।
आज भी मैं जहा रह रहा हूँ यही पास मैं बजरंगबली का मंदिर है तो मैं हर मंगलवार और शनिवार मंदिर ज़रुर जाता हूँ और हनुमान चालीसा, हनुमानाष्टक, बजरंग बाण और श्री राम स्तुति का पाठ करता हूँ। मैं सदा अपने प्रभु की इस कृपा और दया का आभारी रहूँगा। Hanumanji aur Negative Energy in Hindi
उन्होंने मुझे उस समस्या से भी बाहर निकाल दिया जिससे बहुत से लोग नहीं निकल पाते। मैंने प्रभु से ये कहा था की जब मै ठीक हो जाऊंगा तो अपना अनुभव आपके चैनल पर ज़रुर शेयर करूँगा। जिससे उन लोगों को भी मदद मिले जो मेरी तरह भांग के नशे के कारण आये असंतुलन की समस्या से छुटकारा पा सकें।
मैंने जब अपनी समस्या यूट्यूब पर खोजी थी तो मुझे पता चला था की मेरी तरह बहुत से लोग हैं जो भांग के नशे के कारण सेम टू सेम और एक ही तरह के डर तनाव और वहम से गुजरते हैं। इसलिए मेरी यह भी इच्छा है की बजरंगबली उन्हे भी शरण में लें और नरक जैसे इस अनुभव से उन्हे भी छुटकारा मिले। जयेश भाई आप भी ऐसे लोगों के अनुभव शेयर करके लोगों की बहुत मदद कर रहे हैं। बजरंगबली आपको और आपके परिवार को सदा खुश रखे ।
तो दोस्तों देखा आपने हनुमानजी की शरण में जाने के बाद आज अनगिनत लोगो का जीवन बदल रहा है, कितने लोग व्यसन छोड़ रहे है, कितने लोग आत्महत्या से बचे है, बुरी आदतों से बचे है, ये है हमारे हनुमानजी की भक्ति का प्रताप, आप सभी से रिक्वेस्ट है की इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करे ताकि लोगो का जीवन बदल सके, हमारे बजरंगबली बहुत ही दयालु है उनकी शरण में जो भक्त सच्चे दिल से जाता है वे उस भक्त की रक्षा जरूर करते है…तो ऐसे ही हमारे बजरंगबली.
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